सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड मामले में जमानत, जानिए क्या है पूरा मामला और दोबारा क्यों हुई थी गिरफ्तारी
AAP leader and former Delhi minister Satyendar Jain has been granted bail by the Rouse Avenue Court in a Delhi Jal Board corruption case involving alleged manipulation of sewage treatment plant tenders. Jain was arrested by the Delhi government's Anti-Corruption Branch on August 18, 2026. The agency alleges that tender conditions were altered to favour a private company and that project costs were increased. Jain's defence argued that he acted on technical committee recommendations and that his arrest was unnecessary. The detailed bail order is awaited.
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने जैन को ₹2 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती देने का निर्देश दिया।
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकों में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा का आरोप था कि ठेके की शर्तों में बदलाव कर एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया और परियोजनाओं की लागत बढ़ाई गई। मामले में जैन को 18 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
जमानत देते हुए अदालत ने जांच एजेंसी की कार्रवाई पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत के मुताबिक अब तक सामने आए डिजिटल साक्ष्यों में जैन को कथित रिश्वत या हवाला लेन-देन से जोड़ने वाली सामग्री नहीं दिखी। अदालत ने यह भी कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने और गिरफ्तारी के बीच करीब **27 महीने का अंतर** रहा, जबकि इस दौरान जैन जांच में शामिल होते रहे।
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि संबंधित ठेके जुलाई 2022 में दिए गए थे, जबकि जैन उस समय एक अलग धनशोधन मामले में पहले से हिरासत में थे। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को गिरफ्तारी से पहले और ठोस सबूत जुटाने चाहिए थे। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जैन को इस स्तर पर पूरी तरह निर्दोष नहीं माना जा सकता और मामले की जांच आगे जारी रहेगी।
जैन की यह गिरफ्तारी उनके पुराने धनशोधन मामले से अलग है। 2022 में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जबकि इस बार गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड के ठेकों से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में हुई थी।