Trump-Xi Meeting: Trump and Xi Jinping to Meet in Washington on September 24; Modi-Xi Talks at BRICS and New Russia Sanctions Put India-China in Focus
US President Donald Trump and Chinese President Xi Jinping are scheduled to meet in Washington on September 24, 2026. The talks are expected to cover trade, tariffs, Taiwan, Iran, artificial intelligence, technology restrictions and critical minerals. The meeting comes shortly after Prime Minister Narendra Modi held bilateral talks with Xi Jinping during the BRICS Summit in New Delhi. Meanwhile, a new US sanctions law targeting Russia and Iran has raised concerns over potential tariffs on countries purchasing Russian energy, putting India and China under greater scrutiny.
# अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कई अहम मुद्दों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर 2026 को वॉशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं। दोनों नेताओं की इस साल यह दूसरी शिखर बैठक होगी। बैठक से पहले व्यापार, टैरिफ, ताइवान, ईरान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों यानी Critical Minerals को लेकर बातचीत तेज हो गई है।
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। दूसरी तरफ भारत में हाल ही में 12-13 सितंबर को BRICS Summit आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भी द्विपक्षीय बैठक हुई। ऐसे में ट्रंप-शी वार्ता के साथ भारत-चीन संबंध और रूस से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंध भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
## ***24 सितंबर को वॉशिंगटन में ट्रंप-शी की मुलाकात***
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग 24 सितंबर को वॉशिंगटन में मुलाकात करेंगे। Reuters के अनुसार, बैठक में व्यापार वार्ता और दोनों देशों के बीच मौजूदा टैरिफ ट्रूस को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। चीन की ओर से अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाने और अमेरिका की ओर से चीन से Critical Minerals की सप्लाई को लेकर भी बातचीत हो सकती है।
चीन की तरफ से अमेरिकी टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों में राहत की मांग किए जाने की संभावना भी है। वहीं अमेरिका चीन से व्यापार और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर रियायत चाहता है।
बैठक का एजेंडा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहने वाला है। ताइवान, ईरान, AI और fentanyl precursor chemicals जैसे मुद्दे भी बातचीत में शामिल हो सकते हैं।
## ***BRICS Summit में मोदी और शी जिनपिंग की बैठक***
ट्रंप-शी बैठक से कुछ दिन पहले भारत ने नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी की। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को हुआ।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। भारत सरकार के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता, मौजूदा सीमा समझौतों का पालन, व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन, बाजार तक पहुंच, कारोबारी संबंधों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे उठे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। भारत ने संबंधों के लिए Mutual Respect, Mutual Sensitivity और Mutual Interest यानी आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को महत्वपूर्ण बताया।
## ***रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत और चीन पर दबाव***
इसी बीच अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंधों का मुद्दा भी सामने आया है।
16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को पारित किया और इसे राष्ट्रपति के पास भेजा। इससे पहले यह विधेयक सीनेट से भी पारित हो चुका था। कानून रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के लिए राष्ट्रपति को अधिकार देता है।
भारत और चीन इस मामले में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों देश रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार रहे हैं। Reuters के अनुसार, नए अमेरिकी कदम से भारत की ऊर्जा खरीद और अमेरिका के साथ उसके व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चिंता सामने आई है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और विभिन्न स्रोतों से तेल खरीद जारी रखने की बात कही है।
हालांकि, इस कानून को इस तरह समझना जरूरी है कि कानून पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर स्वतः 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति को आगे ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है।
## ***Trump-Xi बैठक में रूस का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?***
रूस से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का असर अमेरिका-चीन संबंधों पर भी पड़ सकता है। चीन रूस के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा संबंध रखता है।
अगर अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो भारत और चीन दोनों के लिए ऊर्जा और व्यापार से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसी वजह से 24 सितंबर की ट्रंप-शी बैठक में केवल अमेरिका-चीन व्यापार ही नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा परिस्थितियां भी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।
## ***ताइवान पर भी रहेगी नजर***
अमेरिका और चीन के बीच ताइवान सबसे संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों में से एक है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में अमेरिका के कुछ सहयोगियों के बीच यह चिंता है कि ट्रंप चीन के साथ आर्थिक समझौते की कोशिश में ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में किसी तरह का बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, यह एक रिपोर्टेड चिंता है और किसी घोषित समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए 24 सितंबर की बैठक में ताइवान को लेकर दोनों नेताओं की बातचीत पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
## ***AI और टेक्नोलॉजी पर अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा***
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत टेक्नोलॉजी भी ट्रंप-शी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
अमेरिका और चीन दोनों AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। Advanced chips, AI technology, technology restrictions और AI से जुड़े सुरक्षा जोखिम दोनों देशों के बीच चर्चा के विषय बने हुए हैं।
इसके अलावा Critical Minerals और Rare Earths भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई हाई-टेक उद्योगों में इनका इस्तेमाल होता है। अमेरिकी अधिकारियों और चीनी अधिकारियों के बीच बैठक से पहले भी AI, व्यापार और Rare Earths को लेकर बातचीत की तैयारी की खबरें सामने आई हैं।
## ***क्या चीन को अमेरिकी टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है?***
ट्रंप-शी वार्ता में चीन की ओर से अमेरिकी टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों में राहत की मांग एक संभावित मुद्दा है। इसके बदले अमेरिका चीन से व्यापार और Critical Minerals की सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर प्रगति की मांग कर सकता है।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक के बाद कोई बड़ा समझौता होगा या केवल बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति बनेगी।
## ***चीन के साथ कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच सकता है अमेरिका***
Reuters के मुताबिक, शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान BYD, CATL, Xiaomi, Gotion, Hisense, Wanxiang Group, Bank of China और COFCO Group जैसी चीनी कंपनियों के अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम सूची में बदलाव संभव है।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका-चीन संबंधों में सरकारी बातचीत के साथ व्यापार और टेक्नोलॉजी कंपनियों के संबंध भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
## ***भारत के लिए क्या मायने रखती है पूरी स्थिति?***
भारत के लिए अमेरिका और चीन के बीच बदलता समीकरण कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत को एक तरफ अपनी ऊर्जा जरूरतों और दूसरी तरफ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखने की बात कही है।
दूसरी तरफ BRICS Summit के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में सीमा, व्यापार, सप्लाई चेन और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। इससे भारत-चीन संबंधों में संवाद का एक महत्वपूर्ण चैनल सक्रिय रहने का संकेत मिलता है।
## ***अब आगे क्या देखने को मिलेगा?***
24 सितंबर की ट्रंप-शी बैठक के बाद कई मुद्दों पर नजर रहेगी।
सबसे पहले यह देखा जाएगा कि अमेरिका और चीन मौजूदा व्यापारिक तनाव और टैरिफ को लेकर क्या रास्ता निकालते हैं। इसके अलावा Critical Minerals, टेक्नोलॉजी प्रतिबंध, चीनी खरीदारी और AI से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रगति होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
ताइवान और ईरान जैसे रणनीतिक मुद्दों पर दोनों नेताओं की बातचीत भी अहम रहेगी।
भारत के लिए रूस से तेल खरीद, संभावित अमेरिकी टैरिफ और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण बने रहेंगे। वहीं भारत-चीन संबंधों में BRICS Summit के दौरान हुई बातचीत के बाद सीमा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर आगे की प्रगति पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल 24 सितंबर की Trump-Xi Meeting को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश व्यापार और रणनीतिक मतभेदों को कुछ हद तक कम करने के लिए किसी समझौते तक पहुंचते हैं या बातचीत को आगे जारी रखने पर सहमति बनती है।