फ्लाईदुबई हमले का 'मास्टरमाइंड' कौन?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगता है कि 30 सितंबर को हुई इस 'आतंकी' घटना के तार ईरान से जुड़े हैं। हालांकि, उनका यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस सतर्क बयान के ठीक उलट है, जिसमें वेंस ने स्पष्ट कहा था कि अभी तक ईरान की संलिप्तता का कोई "पक्का सबूत" सामने नहीं आया है।
**वॉशिंगटन/दुबई।** फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुई चाकूबाजी और विमान को क्रैश कराने की कोशिश के पीछे असली चेहरा कौन है? इस सवाल पर अब अमेरिकी नेतृत्व के सुर ही अलग-अलग सुनाई दे रहे हैं। एक तरफ़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर शक है, तो दूसरी तरफ़ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस पर सावधानी बरत रहे हैं।
**ट्रंप ने क्या कहा?**
सोमवार दोपहर एयर फ़ोर्स वन में सवार होते वक़्त एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या फ्लाईदुबई की घटना में ईरान शामिल था। ट्रंप ने जवाब दिया, "हाँ, मुझे लगता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है।"

**वेंस ने क्यों बनाई दूरी?**
अलास्का जाते समय पत्रकारों ने वेंस और सेकंड लेडी उषा वेंस से ईरान के कथित कनेक्शन पर सवाल किया। वेंस ने सीधी टिप्पणी से इनकार करते हुए मामला CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ़ और अन्य इंटेलिजेंस अधिकारियों पर छोड़ दिया। उन्होंने कहा, "मैं किसी भी घोषणा से पहले कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन निश्चित रूप से हम इस पर गौर कर रहे हैं। हालाँकि, मैं यह नहीं कहूँगा कि मैंने अभी तक कुछ भी पक्का देखा है।"
**जांच में अब तक क्या मिला?**
इज़राइल, UAE और सऊदी अरब के अधिकारी इसे आतंकी हमला बता चुके हैं। UAE के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने 3 अक्टूबर को कहा कि जांच में पता चला है कि को-पायलट अल-हम्मामी ने आतंकी हमले की कोशिश की थी। अधिकारी घटना के पूरे हालात, मकसद और किसी भी तरह के कनेक्शन की पड़ताल कर रहे हैं।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में अल-हम्मामी ने बताया कि उसकी योजना तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर विमान क्रैश करने की थी। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि उसने इस साल की शुरुआत में तेल अवीव में एक और विमान क्रैश कराने पर विचार किया था, पर बाद में योजना छोड़ दी। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे सऊदी अधिकारियों ने UAE को सौंप दिया था।

उधर NBC न्यूज़ ने जांच से जुड़े अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अधिकारियों को लगता है कि ओमान के इस को-पायलट ने अकेले ही यह काम किया और वह किसी बड़े संगठन का हिस्सा नहीं था। हालाँकि रिपोर्ट के मुताबिक जांच अभी शुरुआती चरण में है।
**अब भी अनसुलझा सवाल**
अधिकारियों ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह साफ़ नहीं किया है कि अल-हम्मामी अकेला था या उसका किसी संगठन या विदेशी देश से संबंध था। ऐसे में ट्रंप का "व्यक्तिगत आकलन" सही निकलेगा या जांच कोई और दिशा दिखाएगी, इस पर अब सबकी नज़र है।